चीनी कंपनियों पर सरकार की कड़ी नजर, निवेश प्रस्तावों की हो रही गहन छानबीन

नई दिल्ली पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की हरकतों के बाद सरकार चीन से आ रहे निवेश प्रस्तावों पर फूक-फूककर कदम आगे बढ़ा रही है। यही कारण है कि चीनी कंपनियों के कई प्रस्तावों को काफी समय से हरी झंडी नहीं मिली है। इनमें से कई प्रस्तावों को फिलहाल रोककर रखा गया है क्योंकि उन्हें गृह मंत्रालय की तरफ से सिक्योरिटी क्लीयरेंस नहीं मिला है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक इनमें ग्रेट वॉल मोटर्स (GWM), पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हेंगली (Hengli) और फोटोन चाइना (Foton China) के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा, 'नेशनल सिक्योरिटी क्लीयरेंस का मकसद इन प्रस्तावों से जुड़े संभावित खतरों का आकलन करना और इस पर नेशनल रिस्क एसेसमेंट देना है। डिपार्टमेंट ऑफ प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) की नई एफडीआई पॉलिसी आने के बाद इन कंपनियों के मालिकों, प्रमोटरों और डायरेक्टरों के बारे में गहन छानबीन की जा रही है। अभी मंत्रालय के पास ऐसे 175 प्रस्ताव लंबित हैं।' एफडीआई नियमों में बदलावडीपीआईआईटी के मुताबिक भारत से सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश केवल गवर्नमेंट रूट से ही हो सकते हैं। इस बारे में अप्रैल में एफडीआई नियमों में बदलाव किया गया था। इसका मकसद कोरोना काल में भारतीय कंपनियों के मौकापरस्त अधिग्रहण को रोकना था। खासकर चीन को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया था। भारत में दो तरीकों से एफडीआई की अनुमति है। पहला ऑटोमैटिक रूट है जिसमें कंपनियों को सरकार से मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ती है। दूसरा गवर्नमेंट रूट है जिसके लिए कंपनियों को केंद्र से मंजूरी लेनी पड़ती है। अधिकारियों का कहना है कि पहले केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले निवेश पर ही गवर्नमेंट रूट लागू होता था। 17 सेक्टर्स में सरकारी मंजूरी की जरूरतएक अधिकारी ने कहा कि अब 17 सेक्टर्स में सरकारी मंजूरी की जरूरत पड़ती है। इनमें डिफेंस, टेलीकॉम और फार्मा शामिल है। अगर कोई विदेशी कंपनी 10 फीसदी या उससे अधिक निवेश करना चाहती है तो उसे सरकारी मंजूरी लेनी पड़ती है। इन सेक्टर्स में निवेश प्रस्तावों को क्लीयरेंस देने के लिए फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट्स से मिले सुझावों पर गौर किया जाता है। ऑटोमोबाइल सेक्टर ऑटोमैटिक अप्रूवल रूट में शामिल है लेकिन चीन से आने वाले किसी भी एफडीआई के लिए सरकारी क्लीयरेंस की जरूरत पड़ती है। ग्रेट वॉल मोटर्स ने जनरल मोटर्स की पुणे के करीब तालेगांव में स्थित फैक्ट्री का जनवरी में अधिग्रहण किया था। सूत्रों का कहना है कि कंपनी की अगले साल भारत में अपनी गाड़ियां उतारने की योजना है और इससे पहले उसने डीपीआईआईटी और कंप्टीशन कमीशन ऑफ इंडिया से संपर्क साधा था। 59 चीनी ऐप्स पर पांबदीसरकार ने नेशनल सिक्योरिटी और पब्लिक ऑर्डर को खतरे का हवाला देते हुए पिछले महीने 59 चीनी ऐप्स पर पांबदी लगा दी थी। इनमें बाइटडांस का टिकटॉक और टेंसेंट का वीचैट शामिल है। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद सरकार ने यह कदम उठाया था। अधिकारियों का कहना है कि भारत में चीनी निवेश पर कड़ी नजर रखी जा रही है और चीनी कंपनियों द्वारा स्पांसर किए गए वीजा के पूर्व सिक्योरिटी क्लीयरेंस की जरूरत पड़ सकती है।


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