नई दिल्ली मोदी सरकार देश में आर्थिक गतिविधि में तेजी लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर हुआ है। जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती है और वैक्सिनेशन का प्रोग्राम बड़े स्तर पर शुरू नहीं हो जाता है, तब तक औद्योगिक गतिविधि में उस हद तक तेजी लाना संभव भी नहीं है। इससे इतर अपने देश में ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम इतना कमजोर है कि उद्योग जगत के लिए कॉस्ट कटिंग बड़ी चुनौती है। अब इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। पर काम औद्योगिक गतिविधि में तेजी लाने, ट्रांसपोर्टेशन की समस्या को दूर करने के लिए मोदी सरकार ने 65 हजार करोड़ का नैशनल मास्टर प्लान तैयार किया है। इस मास्टर प्लान के तहत देश के करीब 200 इकनॉमिक जोन आपस में जोड़े जाएंगे ताकि ट्रांसपोर्टेशन आसान और तेज हो। नैशनल मास्टर प्लान को लेकर पीएम मोदी ने खुद हाई लेवल बैठक की। बैठक में फैसला लिया गया कि अगले पांच सालों में 200 इकनॉमिक जोन के लिए मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी के तहत सरकार 65 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। कनेक्टिविटी का जाल इस तरह बुना और बिछाया जाएगा कि उद्योग जगत की कॉस्टिंग और टाइमिंग की बचत हो। स्मूद कनेक्टिविटी के लिए मास्टर रोडमैप तैयार देश के अलग-अलग शहरों में ऐग्रिकल्चर, फिशिंग, डिफेंस क्लस्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और फॉर्मास्युटिकल को लेकर अलग-अलग इकनॉमिक जोन बने हुए हैं। रोड, रेलवे, शिपिंग और सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने इन इकनॉमिक जोन को आपस में कनेक्ट करने के लिए एक डीटेल्ड कनेक्टिविटी रोडमैप तैयार किया है। इस रोडमैप में ध्यान रखा गाय है कि ये जोन आपस में इतने अच्छे से कनेक्टेड हों कि लोगों और सामान की आवाजाही आसानी से और कम समय में हो।
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