कमजोर कॉरपोरेट गवर्नेंस इंडिगो की पैरंट कंपनी इंटरग्लोब को डुबा देगा: को-फाउंडर राकेश गंगवाल

सतीश जॉन, मुंबई के अरबपति को-फाउंडर और एयरलाइन इंडस्ट्री वेटरन राकेश गंगवाल पैरंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन का पीछा कमजोर कॉरपोरेट गवर्नेंस से हर कीमत पर छुड़ाने को तैयार हैं। यह कदम वह एक बड़े मकसद से उठा रहे हैं। ईटी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'इंडिगो का नुकसान देश बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। इसके तार देश के आर्थिक स्वास्थ्य से पूरी तरह जुड़ गए हैं। आप ही देखिए कि कमजोर कॉरपोरेट गवर्नेंस और बोर्ड की कमजोर नजर के चलते कितनी कंपनियां मुश्किल में फंसी हैं।' को-फाउंडर राहुल भाटिया के साथ गंगवाल के मतभेद छुपे नहीं हैं लेकिन इनके सेबी में शिकायत करने से निवेशकों को बड़ा झटका लगा। कंपनी का स्टॉक बुधवार को 11% की गिरावट के साथ 1,392.00 पर बंद होने से पहले कारोबार के दौरान 17% लुढ़क गया था। गंगवाल ने कहा, कंपनी अच्छा बिजनस मॉडल होने के बावजूद लॉन्ग टर्म में सर्वाइव नहीं कर पाएगी अगर कॉरपोरेट गवर्नेंस का रिकॉर्ड अच्छा नहीं होगा। कमजोर कॉरपोरेट गवर्नेंस और कमजोर बोर्ड के चलते बड़ी-बड़ी कंपनियां फेल रही हैं। रेगुलेटर को मसला सुलझाना चाहिए। इंडिया में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं। दोषी कंपनियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।' 2015 में आईपीओ के वक्त भाटिया और गंगवाल के करीबी रिश्तों ने इंडिगो को लेकर नैरेटिव तैयार करने में अहम रोल अदा किया था। भाटिया लो प्रोफाइल रहते थे और गंगवाल हाथ दबाकर कंपनी चलाते थे और प्लेंस के बड़े ऑर्डर देने में तोलमोल करने की अपनी काबिलियत दिखाते थे। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि उन्होंने एकतरफा शेयरहोल्डर अग्रीमेंट क्यों किया? जिससे भाटिया के IGE ग्रुप को एमडी, प्रेजिडेंट और सीईओ नियुक्त करने का अधिकार मिल गया। इंटरग्लोब के सीर्इओ रोनोजॉय दत्ता ने गंगवाल के साथ लंबे समय तक काम किया था। दोनों इंडिगो आने से पहले यूएस एविएशन में टॉप पोस्ट्स पर रहे थे। गंगवाल ने कहा कि कई इंडियन कंपनियों के फेल होने की वजह कमजोर कॉरपोरेट गवर्नेंस रही है। इसलिए उन्होंने इस बारे में पहले सेबी और फिर प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से शिकायत की है। इंडिगो में झगड़ा तब बढ़ा है जब उसे जेट एयर के ऑपरेशन बंद होने से बने मौके का पूरा फायदा मिलने जा रहा है। गंगवाल ने कहा, '(शिकायत पर) कुछ समय तक मेरे ऊपर निजी हमले होंगे और कुछ वित्तीय नुकसान होगा लेकिन मेरे दिमाग में यह चल रहा है कि अगर चीजें आज सही नहीं हुईं तो हमारे साथ भी दूसरी एयरलाइन जैसी स्थिति हो सकती है। लॉन्ग टर्म में इंडिगो मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस वाली कंपनी के तौर पर उभरेगी।' इंटरग्लोब का मार्केट कैपिटलाइजेशन बुधवार को 6,462 करोड़ रुपये की तेज गिरावट के साथ 53,766 करोड़ रुपये पर आ गया। गंगवाल कहते हैं कि दर्द जितनी जल्दी आए, उतना अच्छा। वह कहते हैं, 'जी हां। इससे जुड़ा वित्तीय पहलू है- एक हद तक मेरे साथ दूसरे माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स भी प्रभावित होंगे लेकिन इंडिगो पांच या दस साल बाद अगर लड़खड़ाएगी तो मुझे ज्यादा तकलीफ होगी।'


from Latest Business News in Hindi - बिज़नेस खबर, बिज़नेस समाचार, व्यवसाय न्यूज हिंदी में | Navbharat Times http://bit.ly/2JAEezB
Previous Post
Next Post
Related Posts