मुंबई/नई दिल्लीइंडिगो के प्रमोटरों के बीच चला आ रहा झगड़ा मंगलवार को तब और बढ़ गया, जब इनमें से एक ने सेबी से कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस के बारे में शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि 'पान की दुकान' ने भी इस मामले में कंपनी से बेहतर काम किया होता। इंडिगो में 37 पर्सेंट हिस्सेदारी रखने वाले ने 38 पर्सेंट स्टेक रखने वाले के खिलाफ यह शिकायत की। दो प्रमोटरों का झगड़ा गंगवाल ने कहा कि उनके और भाटिया के बीच जो अग्रीमेंट है, उससे इंडिगो पर भाटिया को 'कंट्रोलिंग राइट्स' मिले हुए हैं। इसी वजह से कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों में विविधता नहीं है। उन्होंने कहा कि शायद इसीलिए कंपनी में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की बुरी हालत हो गई है। ईटी ने 17 मई के अंक में खबर दी थी कि अग्रीमेंट के हिसाब से भाटिया का पलड़ा भारी है। इसी को लेकर दोनों प्रमोटरों के बीच टकराव है। गंगवाल ने सेबी को लिखे लेटर में आरोप लगाया है कि भाटिया 'दूसरी कंपनियां खड़ी कर रहे हैं, जो इंडिगो के साथ दर्जनों रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस करें।' गंगवाल का भाटिया पर आरोप उन्होंने एक लेटर बोर्ड को भी लिखा है। इसमें गंगवाल ने आरोप लगाया है कि बिना ऑडिट कमिटी की मंजूरी के आईजीई ग्रुप के साथ कई रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस किए गए। इनके लिए बाहरी कंपनियों से बोली तक नहीं मंगाई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इनमें से कई पर पिछली तारीख से दस्तखत किए गए। 2003-04 में लाया इंडिगो 2003-04 में गंगवाल और भाटिया ने भारत में साथ मिलकर इंडिगो एयरलाइन लॉन्च की। एयरलाइन ने करीब 2-3 साल तक बढ़िया और आसानी से परिचालन किया और इसके बाद कम दाम वाली इस हवाई सेवा ने बड़ा विस्तार किया। देश में मार्केट शेयर के तौर पर यह नंबर 1 एयरलाइन बन गई। गंगवाल के पास 30 सालों का अनुभव गंगवाल एक अमेरिकी नागरिक और नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं। उनके पास एविएशन इंडस्ट्री में 30 साल से ज्यादा का अनुभव और एयरलाइन में तकरीबन 37 प्रतिशत स्टेक्स हैं। वह 1984 से करीब 10 साल तक अमेरिका में रहे और इसके बाद उन्होंने ईवीपी (प्लानिंग ऐंड डिवेलपमेंट) के तौर पर एयर फ्रांस जॉइन कर लिया। इसके बाद उन्होंने यूएएस एयरवेज ग्रुप और यूएस एयरवेज में बतौर प्रेजिडेंट और सीईओ 2001 तक काम किया। कर्मचारियों की शिकायत विदेशों में टॉप एविएशन प्रफेशनल्स का बड़ा नेटवर्क रखने वाले गंगवाल ने इंडिगो के विदेशी बाजारों में विस्तार करने के बारे में सोचना शुरू कर दिया। इसी दौरान पिछली गर्मियों में इंडिगो के प्रेजिडेंट आदित्य घोष ने कंपनी छोड़ दी थी। इससे पहले इंडिगो के मुख्य कमर्शल और नेटवर्क चीफ संजय कुमार ने भी कंपनी को बाय-बाय बोल दिया था। इंडिगो के कर्मचारियों ने पहली बार कंपनी में काम करने के माहौल को लेकर भी शिकायत की।
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