धनंजय महापात्रा, नई दिल्ली देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले आम में करोड़पति अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाए जाने का ऐलान किया। बजट में किए गए इस ऐलान का सबसे ज्यादा असर देश के अमीर वकीलों पर पड़ेगा। बजट के मुताबिक, 2 से 5 करोड़ की सालाना आय पर सरचार्ज मिलाकर 39 पर्सेंट का टैक्स देय होगा, जबकि 5 करोड़ से ज्यादा की कमाई पर सरचार्ज जोड़कर यह दर 42.7 पर्सेंट होगी। करोड़ों की कमाई करने वालों के इस दायरे में आने वाले जाने-माने वकीलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इस लिस्ट में कुछ रिटायर्ड जज भी हो सकते हैं जो मोटी कमाई कर रहे हैं। देश में कुछ ऐसे सफल वकील हैं जो रोजाना 1 करोड़ रुपये तक की कमाई करते हैं। आपको याद होगा एक सफल वकील व राजनेता अरुण जेटली द्वारा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर किए गए 10 करोड़ के मानहानि का केस, जिसमें देश के दिग्गज क्रिमिनल लॉयर राम जेठमलानी ने मोटी फीस मांगी थी। ट्रायल कोर्ट में हर अपीयरेंस के लिए उन्होंने 1.22 करोड़ रुपये की रिटेनर फीस चार्ज की थी। हालांकि, इस बजट में किए गए ऐलान का जेठमलानी पर ज्यादा असर नहीं होगा, क्योंकि वह काफी शोहरत और पैसा कमाने के बाद शांति से रिटायर हो चुके हैं। सफलता, शोहरत, पैसा और कानूनी ज्ञान के मामले में उनके करीब तक पहुंचने वालों में सोली जे सोराबजी, फली एस नरीमन, के पारासरन आदि बड़े नाम हैं। हालांकि, जेठमलानी से अलग, ये दिग्गज बहुत कम केस चुनते हैं और सुप्रीम कोर्ट के केस ही लेते हैं। कुछ साल पहले तक ये तीनों वकील सालाना आय के मामले में सुपर रिच की कैटिगरी में आते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सीतारमन के 'टैक्स द सुपर रिच(करोड़ों कमाने वाले पर ज्यादा टैक्स)' की कैटिगरी से बाहर रहने वालों में इन तीन वकीलों के आलावा रोहिन्टन एफ नरीमन, यू यू ललित और एल नागेश्वर राव भी शामिल हैं क्योंकि मोटी कमाई की 'कुर्बानी' देकर अब ये सुप्रीम कोर्ट में जज बन गए हैं। हालांकि हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी, कपिल सिब्बल, ए एम सांघ्वी, गोपाल सुब्रमण्यम, पी चिदंबरम, सलमान खुर्शीद, पराग त्रिपाठी, केटीएस तुलसी, मनिंदर सिंह, विकास सिंह, रंजीत कुमार, सिद्धार्थ लूथरा, अजीत सिन्हा, श्याम दीवान और केवी विश्वनाथ को कमाई पर मोटा टैक्स देना होगा। करोड़ों की कमाई करने वाले वकीलों की लिस्ट काफी लंबी है, ये नाम उनमें से कुछ ही हैं। 1992 में उदारीकरण और वैश्वीकरण के बाद से कानून से जुड़े प्रफेशन में काफी कमाई होने लगी। उदारीकरण के बाद के दो दशकों में सफल वकीलों की फीस काफी बढ़ गई और पहले जो वकील आसानी से केस ले लेते थे, वे अनअफोर्डेबल हो गए। देश में कोई और प्रफेशन ऐसा नहीं है जिसमें सुप्रीम कोर्ट में 5 मिनट की पैरवी के लिए 15-20 लाख रुपये तक की फीस ली जाती है। ऐसे भी कई मामले हैं जिनमें वरिष्ठ वकील केस डिस्कस करने के लिए लाखों की कसल्टेंसी फीस लेते हैं।
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