बढ़ती बेरोजगारी लेकिन केंद्र में खाली हैं 7 लाख पद, सबसे ज्यादा रेलवे में वेकन्सी

अमन शर्मा, नई दिल्ली भारत में जहां रोजगार की कमी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है, इसी बीच ने गुरुवार को संसद को बताया कि 2018 में तमाम मंत्रालयों और विभागों में लगभग सात लाख नौकरियां खाली थीं। केंद्र ने यह जानकारी विपक्षी सांसद शमशेर सिंह दूलो, ए याग्निक, एल हनुमंथैय्या और सुरेंद्र सिंह नागर के सवालों के जवाब में दी। सबसे ज्यादा वेकेंसी रेलवे (2.59 लाख पद), डिफेंस (सिविलियन) (1.87 लाख पद), रेवेन्यू डिपार्टमेंट (78,653 पद) और होम मिनिस्ट्री (72,365 पद) में हैं। प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में 114 और प्रेसिडेंट सेक्रिटेरिएट में 75 वेकेंसी हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के दौरान रोजगार को बड़ा मुद्दा बनाया था। सरकार ने बताया कि केंद्र में कुल 38 लाख पदों को स्वीकृति मिली हुई है, जिनमें से 6.83 लाख खाली हैं। प्राइम मिनिस्टर ऑफिस और पर्सनेल मिनिस्ट्री के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लिखित जवाब में बताया, 'केंद्र सरकार में पद रिटायरमेंट, मृत्यु, प्रमोशन की वजह से खाली हुए हैं और रिक्रूटमेंट संबंधित मंत्रालयों, विभागों और ऑर्गनाइजेशन को करना होता है। खाली पदों को भरने की प्रक्रिया लगातार चलती है।' लेटरल एंट्री से ग्रुप ए अफसरों की जाति का डेटा नहीं रखती सरकार सरकार पिछले दो दिनों से संसद में सवालों से घिरी हुई है। सांसदों ने पूछा है कि क्या लेटरल एंट्री प्रोसेस में आरक्षण के नियमों का पालन हो रहा है? समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रवि प्रकाश वर्मा ने लेटरल एंट्री के जरिए ग्रुप 'ए' पदों पर प्राइवेट सेक्टर से नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों की जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा कि इनमें जनरल, एससी, एसटी और ओबीसी कैटेगरी के कितने लोग हैं। सरकार ने इस पर लिखित जवाब दिया, 'सरकार ने समय-समय पर खास असाइनमेंट्स के लिए कुछ प्रॉमिनेंट लोगों को उनकी विषय की जानकारी को ध्यान में रखते हुए नियुक्त किया है। केंद्र लेटरल एंट्री के जरिए ग्रुप 'ए' के पदों पर नियुक्त किए गए लोगों की जाति का डेटा नहीं रखती है।' इसी तरह बुधवार को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सजदा अहमद ने पूछा था कि क्या लेटरल एंट्री के जरिए नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों को आरक्षण दिया जाता है? इसके जवाब में सरकार ने बताया कि यह सैद्धांतिक रूप से तय किया गया है कि डेप्युटी सेक्रटरी/डायरेक्टर लेवल पर बाहर से एक्सपर्ट्स को नियुक्त किया जाए, 'इस पर आखिरी फैसला नहीं हुआ है।' इस कारण नियुक्त किए गए लोगों में आरक्षण का सवाल ही नहीं खड़ा होता। हालांकि सरकार ने यह नहीं बताया कि लेटरल एंट्री के जरिए भरे जाने वाले 9 जॉइंट सेक्रटरी पदों पर भी यह लागू होता है या नहीं।


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