'गहरे बुनियादी सुधार होने पर 7% से ज्यादा ग्रोथ मुमकिन'

नई दिल्ली 15वां अपनी रिपोर्ट अक्टूबर में सौंपेगा, वह फिलहाल राज्यों के साथ सलाह कर रहा है। आयोग के अध्यक्ष ने ईटी को बताया कि रिपोर्ट में ऐलोकेशन को 42% से बढ़ाकर 50% करने की राज्यों की मांग और न्यू इंडिया 2022 पर होने वाले खर्च को लेकर मांगी गई आपत्तियों पर समुचित राय होगी। पेश हैं अनुभूति विश्नोई को दिए इंटरव्यू के मुख्य अंश: राज्यों का आवंटन 42% से 50% किए जाने की मांग कोई ऐसा राज्य नहीं, जिसने यह मांग न की हो। हालांकि, मसला यह है कि कौन सी केंद्र सरकार यह चाहेगी कि उसे इस पर राज्यों की मांग मानने को मजबूर किया जाए और 42% पर कायम न रहने दिया जाए। राज्य हमसे ज्यादा से ज्यादा हिस्सा लेना चाहेंगे। यह स्वाभाविक है। राज्य जिन योजनाओं पर काम करना चाहते हैं, मैं उनकी गुणवत्ता पर कॉमेंट नहीं कर रहा हूं। मैं समझता हूं कि वे बहुत अहम होंगे लेकिन हमें उन पर समुचित राय बनानी होगी। न्यू इंडिया के ऐक्सपेंडिचर पर राज्यों की आपत्ति ये मुद्दे राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकता वाले हैं और ज्यादातर यानी शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल निकासी, पेज जल, असल में राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकता वाले हैं। ये केंद्र प्रायोजित होने चाहिए या नहीं, यह अलग मामला है। हम इन सब पर बारीकी से गौर करेंगे। 'लोकलुभावन व्यय' हम इन पर विचार करेंगे। हम इसकी स्टडी करना चाहते हैं। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जो शुरुआत में लोकलुभावन थे, बाद में आम हो गए। जब तमिलनाडु ने मिड डे मील योजना शुरू की थी, तब सबने इसकी आलोचना की थी। अब इसे हर जगह देशभर के स्कूलों में बच्चों के दाखिले और उनकी रोजाना मौजूदगी को लेकर जरूरी माना रहा है। फिस्कल डेफिसिट सीलिंग बढ़ाने की नीतीश की मांग सरकारी खजाना बढ़ाने की राह पर चलने का एनडीए का अमिट रिकॉर्ड रहा है। प्राइम मिनिस्टर मोदी खुद इस पर अटल हैं। इसीलिए FRBM कमिटी की सिफारिशों की प्रोसेसिंग फटाफट की गई। फाइनैंस बिल 2018 पूरी तरह कमिटी की सिफारिशों के अनुरूप है। मुझे लगता कि लोग हाल में पास हुए कानून में बदलाव चाहते हैं। 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में जीएसटी से जुड़ी आपत्तियों पर गौर किया जाएगा? शर्तिया। मेरी रिपोर्ट में GST से जुड़ी कई सिफारिशें होंगी। मैंने जीएसटी काउंसिल और कमीशन के बीच सलाह-मशविरे की व्यवस्था लागू करने को लेकर पूर्व और मौजूदा वित्त मंत्री को पत्र लिखा था। वित्त मंत्री इस सिफारिश पर सकारात्मक तरीके से गौर कर रही हैं, मेरे पास यह मानने की पक्की वजहें हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बातचीत की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी, जहां हम GST को सरल और तार्किक बनाने को लेकर राय रखेंगे। हम इस बारे में भी राय रखेंगे कि इससे किस तरह आय बढ़ाई जा सकती है। अर्थव्यवस्था की स्थिति आर्थिक वृद्धि दर के ट्रेंड को लेकर मेरी उम्मीदें बनी हुई हैं। गहरे बुनियादी सुधार होने पर मीडियम टर्म में 7% से ज्यादा ग्रोथ की संभावना बनेगी। मेरे हिसाब से सरकार इस दिशा में पक्का काम करेगी। कहां-कहां दिक्कतें हो सकती हैं?‌ पहल, 3.4% फिस्कल डेफिसिट का आंकड़ा कितना भरोसेमंद है। क्या इसमें सभी खर्च ऐड कर दिए गए हैं। सच तो यह है कि सरकार के पास भुगतान के लिए पुराने बिल हैं। इसने बजट के प्रविजन से हटकर उधारी जुटाई है। दूसरी राज्यों से जुड़ी है। सेंटर तो अपना डेट 2024-25 तक GDP के 40% तक ला सकता है लेकिन हर राज्य ऐसा कर पाएंगे, ऐसा सोचना अव्यवहारिक है।


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