नई दिल्ली देश में 1991 में लागू हुई उदारीकरण की नीतियों के बाद से अब तक काफी बदलाव आ चुका है। एक तरफ देश में लोगों की में इजाफा हुआ है तो दूसरी तरफ आधुनिक सुविधाओं वाली चीजें पहले से सस्ती भी हुई हैं। इसके चलते तमाम चीजों तक लोगों की पहुंच आसान हुई है, जिन्हें खरीदना कभी आम लोगों के लिए एक सपना हुआ करता था। आइए, जानते हैं 1991 से 2019 तक के इस दौर में कैसे क्या बदला... महंगाई से ज्यादा बढ़ गई कमाई उदारीकरण लागू होने के वक्त भारत सरकार के एक सचिव की सैलरी प्रतिदिन 263 रुपये थी, जो अब बढ़कर 7,397 रुपये हो गई है। तब से अब तक तमाम चीजों की कीमतों में भी बड़ा इजाफा हुआ है, लेकिन उससे कहीं अधिक गति से वेतनमान भी बढ़ा है। इसके चलते नागरिकों की क्रय शक्ति में इजाफा हुआ है। कैमरे से लेकर दक्षिण दिल्ली में 2 बीएचके फ्लैट तक की खरीद अब लोगों के लिए पहले से आसान हुई है। कैमरा: तब 6 दिन की कमाई, अब एक दिन 1991 में एक कैमरे की कीमत 1,575 रुपये के करीब थी, तब की कमाई के हिसाब से इसकी खरीद के लिए 6 दिन की आय लगती थी, लेकिन अब एक डिजिटल कैमरा 6,500 रुपये में मिलता है और एक दिन की सैलरी से कम में भी इसे हासिल किया जा सकता है। 3 घंटे की कमाई में टू-इन-वन एफएम उस दौर में एक टू-इन-वन एफएम 1,991 रुपये में मिलता था और इसके लिए 7 दिन और 4 घंटे की सैलरी की जरूरत थी। अब 27 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसकी कीमत अब भी 2,000 रुपये ही है, जबकि सैलरी काफी बढ़ चुकी है। इस तरह से इसे अब महज 3 घंटे की कमाई में ही खरीदा जा सकता है। एक दिन की कमाई में ले आएं फ्रिज उदारीकरण के दौर में 165 लीटर का एक फ्रिज 6,800 रुपये में मिलता था, लेकिन अब यह 10,290 रुपये में उपलब्ध है। उस दौर में सैलरी कम होने के चलते 25 दिन और 6 घंटे की कमाई लगती थी, लेकिन अब 1 दिन और 4 घंटे की इनकम खर्च करके इसे घर लाया जा सकता है। कमाई बढ़ी, वॉशिंग मशीन के दाम नहीं 1991 में वॉशिंग मशीन 7,290 रुपये की थी, लेकिन अब भी इसकी औसत कीमत में बहुत इजाफा नहीं हुआ है और यह 8,499 रुपये में उपलब्ध है। तब इसकी खरीद के लिए 27 दिन की कमाई लगती थी, अब यह 1 दिन और दो घंटे की आय में ही हासिल है। एक दिन कमाएं और कलर टीवी घर लाएं तब कलर टीवी की कीमत 12,590 रुपये के करीब थी, लेकिन अब भी इसकी कीमत में बहुत इजाफा नहीं हुआ है और यह 13,000 रुपये में उपलब्ध है। 1 महीने 17 दिन की कमाई में 1991 में इसे खरीदा जा सकता था, लेकिन अब 1 दिन और 7 घंटे ही काफी हैं। मोटरसाइकल खरीदना भी हुआ बेहद आसान 1991 में 100 सीसी की मोटरसाइकल की कीमत 13,1000 रुपये थी। उस दौर में 1 महीने 19 दिन की कमाई में इसे खरीद सकते थे। अब इसकी कीमत 60,000 रुपये है और इसे 8 दिन काम करके हासिल किया जा सकता है। कभी लग्जरी था कंप्यूटर, अब एक दिन काफी उदारीकरण के दौर में कंप्यूटर बेहद लग्जरी आइटम था। उस दौर में एक डेस्कटॉप कंप्यूटर 85,990 रुपये में उपलब्ध था, जिसे 10 महीने और 23 दिन की कमाई से लिया जा सकता था। अब एक बेसिक लैपटॉप तकरीब 28,000 रुपये में है और इसे 3 दिन और 7 घंटे की आय में खरीदा जा सकता है। कार खरीदना भी पहले से बेहद आसान 27 साल पहले 800 सीसी की एक कार 1,67,637 रुपये में उपलब्ध थी। इसके लिए 9 महीने की कमाई लगती थी। अब इसकी औसत कीमत 2,93,000 रुपये है और 1 महीने 9 दिन की मेहनत से इसे घर लाया जा सकता है। फ्लैट खरीदना भी पहले से सस्ता 1991 में दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके में 2 बीएचके फ्लैट की कीमत 9,50,000 रुपये थी। इसके लिए 9 साल 11 महीने की कमाई की जरूरत पड़ती थी। अब इस इलाके में फ्लैट औसतन 75 लाख रुपये में है और इसे 2 साल 9 महीने की आय में लिया जा सकता है।
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