बजट प्रस्ताव पर FM अडिग, FPI को टैक्स से राहत नहीं

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट प्रस्तावों पर अड़ी रहीं और उन्होंने के तौर पर काम करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की सरचार्ज से छूट देने की मांग गुरुवार को नहीं मानी। उन्होंने कहा कि एफपीआई को सरचार्ज से बचने के लिए अपनाना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की सोच यह है कि अमीरों को समाज और राष्ट्र निर्माण में अधिक योगदान देना चाहिए। उन्होंने वित्त विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए संसद को बताया कि सरचार्ज से एफपीआई के देश छोड़कर जाने का डर बेबुनियाद है। निर्मला ने कहा कि मेक इन इंडिया, ईज ऑफ डूइंग बिजनस और स्टार्टअप्स लगाने में दिलचस्पी रखने वाले युवा उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए टैक्स नीति तैयार की गई है। 'एफपीआई के देश छोड़ने का डर फिजूल' वित्त मंत्री ने कहा, ‘एफपीआई के देश से निकलने का डर फिजूल है।’ उन्होंने लोकसभा में वित्त विधेयक पर बहस का समापन करते हुए कहा, ‘सरचार्ज में बढ़ोतरी इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए की गई है और इसका असर ट्रस्ट के रूप में काम करने वाले एफपीआई पर भी पड़ेगा।’ देश में निवेश करने वाले 40 पर्सेंट एफपीआई ट्रस्ट या एसोसिएशंस ऑफ पर्संस (एओपी) के रूप में रजिस्टर्ड हैं। बजट में वित्त मंत्री ने सालाना 2 से 5 करोड़ की आमदनी पर इनकम टैक्स के अलावा, सरचार्ज 15 पर्सेंट से बढ़ाकर 25 पर्सेंट और 5 करोड़ से अधिक की आमदनी पर 37 पर्सेंट कर दिया था। इससे दोनों ग्रुप पर कुल टैक्स बढ़कर क्रमश: 39 पर्सेंट और 42.74 पर्सेंट हो गया था। 'एफपीआई का कंपनी बनना आसान नहीं' वित्त मंत्री के बयान पर एक्सपर्ट्स ने कहा कि एफपीआई के लिए ट्रस्ट से कॉरपोरेट स्ट्रक्चर में शिफ्ट होना आसान नहीं होगा। डेलॉयट हैस्किंस एंड सेल्स एलएलपी के पार्टनर राजेश एच गांधी ने बताया, ‘ज्यादातर एफपीआई ग्लोबल फंड हैं, जो कई देशों में निवेश करते हैं। उन्होंने ट्रस्ट स्ट्रक्चर को होम कंट्री के कानून को ध्यान में रखकर अपनाया है। इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि ट्रस्ट स्ट्रक्चर से उन्हें कामकाज शुरू करने और उसे बंद करने में आसानी होती है। निवेशकों का पैसा लौटाने और प्रशासनिक व कानूनी शर्तों को पूरा करने में भी इससे सहूलियत होती है।’ 'कई तरह के लगेंगे टैक्स' गांधी ने कहा कि स्ट्रक्चर को बदलने के लिए उन्हें भारतीय सिक्यॉरिटीज को ट्रांसफर करना होगा, जिससे न सिर्फ उन पर भारत में कैपिटल गेंस टैक्स लगेगा, बल्कि उन्हें सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, ब्रोकरेज और फॉरेक्स कॉस्ट का बोझ भी उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि टैक्स अथॉरिटीज ऐसे मामलों में जनरल एंटी-अवॉयडेंस रूल्स भी लागू कर सकते हैं। वे एफपीआई के इस तर्क को खारिज कर सकते हैं कि अधिक कैपिटल गेंस टैक्स से बचने के लिए उन्होंने कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को अपनाया था।


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