DVR राइट्स वाले शेयरों की लिमिट बढ़ा सकती है सरकार

करुणजीत सिंह, नई दिल्ली के प्रमोटर्स को कंपनी पर कंट्रोल खोए बिना जुटाने में आसानी हो, इसके लिए सरकार कंपनी कानूनों में डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स (DVR) वाले शेयरों पर लगाई पाबंदियों की समीक्षा करेगी। सरकार खासतौर पर डीवीआर वाले शेयरों के लिए मैक्सिमम 26% की लिमिट और आईपीओ के आवेदन के लिए कंपनी को तीन साल तक डिस्ट्रीब्यूटेबल प्रॉफिट होने के रेकॉर्ड की अनिवार्यता पर दोबारा विचार करेगी। मार्केट रेग्युलेटर ने पिछले महीने के अंतिम हफ्ते में 1 जुलाई से डीवीआर के नए फ्रेमवर्क लागू होने के ऐलान किया था। रिडेम्पशन रिजर्व अनिवार्यता पर भी विचार सरकार आउटस्टैंडिंग डिबेंचर्स के 25% के बराबर रकम का रिडेम्पशन रिजर्व बनाने की अनिवार्यता वाले नॉर्म्स की भी समीक्षा करेगी। दरअसल, इंडस्ट्री इसे बहुत मुश्किल काम बता रही है। एक सीनियर सरकारी अफसर ने कहा, 'डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स और बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने के लिए डिबेंचर रिडेम्पशन रिजर्व की अनिवार्यता से संबंधित प्रावधानों का पालन करना मुश्किल है और उनसे फंड जुटाने की लागत बढ़ती है, तो हमें उन पर पुनर्विचार करना होगा और उसे इस तरह दुरुस्त करना होगा कि निवेश के लिए ज्यादा फंड उपलब्ध हो।' प्रतिबंधात्मक शर्तें आईं आड़े हाल तक सरकार कम वोटिंग राइट्स वाले डीवीआर जारी करने की इजाजत देती रही थी। इसके बावजूद, कुछ प्रतिबंधात्मक शर्तों की वजह से इनका इस्तेमाल ज्यादा नहीं बढ़ नहीं पाया। इस तरह की इक्विटी पूंजी जुटाने वाली मुट्ठीभर कंपनियों में एक टाटा मोटर्स है। मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने पिछले महीने टेक्नॉलजी कंपनियों के लिए नए डीवीआर फ्रेमवर्क को मंजूरी दी थी। सरकार ने इसमें टेक फर्म्स के प्रमोटरों को सुपीरियर वोटिंग राइट्स के साथ कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की सहूलियत दी है। 'डीवीआर नॉर्म्स समीक्षा हाथोंहाथ लेंगे स्टार्टअप्स' एक लीगल एक्सपर्ट ने कहा कि स्टार्टअप्स डीवीआर नॉर्म्स की समीक्षा को हाथोंहाथ लेंगे। लॉ फर्म कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स के पार्टनर अंकित सिंघी ने कहा, 'यह स्वाग योग्य कदम है, क्योंकि इससे उन स्टार्टअप्स की बड़ी चिंता दूर हो जाएगी जो कंट्रोलिंग स्टेक घटाए बिना पूंजी जुटाने के लिए DVR वाले शेयरों का इस्तेमाल करना चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि कंपनियों को डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स वाले शेयरों के लिए 50% या 75% तक की लिमिट किए जाने और तीन साल के डिस्ट्रीब्यूटेबल प्रॉफिट वाले नॉर्म खत्म किए जाने से स्टार्टअप्स के प्रमोटरों को ज्यादा पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी। DRR की अवधि तय करने पर भी विचार सरकारी सूत्र ने यह भी बताया कि इंडस्ट्री ने मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स से 25% आउटस्टैंडिंग डिबेंचर के बराबर रिडेम्पशन रिजर्व बनाने की अनिवार्यता खत्म किए जाने की मांग की थी। हालिया बजट में पब्लिक इश्यू के जरिए फंड जुटानेवाली NBFC के लिए डिबेंचर रिडेम्पशन रिजर्व बनाने की जरूरत खत्म कर दी थी। सूत्र ने बताया कि सरकार डिबेंचर रिडेम्पशन रिजर्व (DRR) बनाने की समय-सीमा तय करने पर भी विचार करेगी। कंपनीज लॉ में कंपनी के प्रॉफिट से डीआरआर बनाने की अनिवार्यता है, लेकिन यह रिक्वायरमेंट पूरी करने के लिए कोई समय सीमा नहीं बताई गई है।


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