मोदी सरकार की इलेक्ट्रिक वीइकल मुहिम को लग सकता है तगड़ा झटका, देश में टैलंट की कमी

प्राची वर्मा, नई दिल्ली जोर-शोर से इलेक्ट्रिक वीइकल की मुहिम में जुटी हुई है। हाल ही में बजट की घोषणा के दौरान इलेक्ट्रिक वीइकल ने लोगों का ध्यान तब खींचा जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर 12 से 5 प्रतिशत तक के जीएसटी कटौती का प्रस्ताव रखा। लेकिन केंद्र सरकार की इस मुहिम को तगड़ झटका लग सकता है। दरअसल मोदी सरकार तो जोर-शोर से तो इस मुहिम में लगी हुई है लेकिन इस दिशा में काम करने के लिए देश में टॉप टेक टैलंट की कमी है। सर्च फर्म्स को फ्रांस, जर्मनी, जापान और चीन जैसे देशों में टैलंट की तलाश करनी पड़ रही है। डिजाइनिंग, प्रॉडक्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टोरेज के तौर पर इलेक्ट्रिक वीइकल एक्सपर्ट की भारी कमी है। पढ़ें- 6.8 करोड़ पैकेज देने को भी तैयार टाटा मोटर्स, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, टीवीएस मोटर, कॉन्टिनेंटल, मारुति सुजुकी जैसी कैंपनियों के अलावा टॉर्कस एथर एनर्जी जैसी स्टार्टअप कंपनियां इलेक्ट्रिक वीइकल की रैंकिंग में भी काबिज होने के लिए या तो टॉप टेक टैलंट को हायर कर रही है या फिर पाइपलाइन बनाने में जुटी हुई हैं। सर्च फर्म जैसे ट्रानसर्च, ईएमए पार्टनर, हंट पार्टनर्स, फेनो और माइकल पेज अपने क्लाइंट के लिए टैलंट की तलाश कर रही हैं जो हर साल 5 लाख डॉलर तक का भुगतान करने के लिए तैयार हैं। हंट पार्टनर, ग्लोबल ओईएम के लिए भारत में हेड की तलाश कर रही है जिसके लिए उनका क्लाइंट 1 मिलियन डॉलर (6.8 करोड़ रुपये) सालाना पैकेज देने के लिए तैयार है। पढ़ें- भारतीय कंपनियां मुस्तैदी से जुटी हंट पार्टनर्स के पार्टनर सुरेश रैना ने बताया, 'हम देश के अंदर भारी कमी की वजह से बाहर टैलंट तलाशने के लिए मजबूर हैं।' मारुति सुजुकी इंडिया के सीनियर एग्जीक्युटिव डायरेक्टर इंजिनियरिंग सीवी रमन भी रैना की बात से इत्तेफाक रखते हैं। उन्होंने बताया, 'भारत में इलेक्ट्रिक वीइकल का विकास अभी नवजात अवस्था में है। लगभग हर संगठन को इलेक्ट्रिक टैलंट जुटाने और विकास के मामले में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।' इससे पहले हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स ने बताया था कि टाटा मोटर्स, काइनेटिक मोटर्स, ऑडी, एमजी मोटर्स, वॉल्वो और निसान सहित अन्य प्रमुख ऑटो कंपनियों के साथ मारुति सुजुकी भी अगले दो सालों में खुद का इलेक्ट्रिक वीइकल लॉन्च करने के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं।


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