नयी दिल्ली, 27 दिसंबर (भाषा) कारपोरेट कार्य मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा है कि ऋण शोधन कानून पासा पलटने वाला है लेकिन कानून में तय समयसीमा का पालन नहीं होना तथा आवेदन स्वीकार करने में देरी चिंता के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के क्रियान्वयन को ‘मिली-जुली कहानी’ करार देते हुए कहा कि कानून के कारण कर्जदारों तथा कर्जदाताओं के व्यवहार पर असर पड़ा है। दिवाला एवं रिण शोधन अक्षमता संहिता दिसंबर 2016 में पूरी तरह अमल में आ गई थी। यह बाजार निर्धारित और समयबद्ध ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया उपलब्ध कराता
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