संकीर्ण अर्थों में परिभाषित नहीं किया जा सकता भारत को: प्रणब

जयपुर, 30 सितंबर (भाषा) राष्ट्र निर्माण में समावेशन की महत्ता को रेखांकित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि देश को सभी तरह के सोच विचारों को समाहित करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश को अपनी युवा आबादी का लाभ उठाने के लिए युवाओं में निहित्त संभावनाओं का समुचित इस्तेमाल करना होगा। मुखर्जी यहां जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी में पांचवें हरिशंकर सिंघानिया स्मृति व्याख्यान दे रहे थे। 'युवा व राष्ट्र निर्माण' पर अपनी बात रखते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा,'हमारा उद्देश्य 'सर्वे भवंतु सुखिना'

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