मुंबई, पांच अक्टूबर (भाषा) बैंक अधिकारियों ने नीतिगत दर में बदलाव नहीं करने के रिजर्व बैंक के अप्रत्याशित फैसले को जोखिम भरा कदम बताया है। वास्तव में बाजार रुपये के मूल्य में गिरावट तथा इसका अन्य संपत्ति पर पड़ रहे असर को देखते हुए नीतिगत दर में वृद्धि की उम्मीद कर रहा था। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्वैमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर 6.50 प्रतिशत पर बरकरार रखा लेकिन अपने नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ की जगह ‘नपे-तुले तरीके से कड़ा करने’ की घोषणा की।
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