1 अगस्त से बताना होगा कहां बना है सामान, लेकिन ये कंपनियां पहले से दे रही हैं जानकारी

नई दिल्ली ई-कॉमर्स कंपनियों (E-commerce companies) से लिए 1 अगस्त से यह बताना जरूरी होगा की वो जिस प्रॉडक्ट की आपूर्ति कर रही हैं, वह कहां बना है। लेकिन कई कंपनियों ने पहले से ही यह जानकारी देनी शुरू कर दी है। इनमें मिंट्रा, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील सहित कई कंपनियां शामिल हैं। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) ने बुधवार को कहा कि सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को 1 अगस्त तक अपने सभी न्यू प्रॉडक्ट लिस्टिंग के कंट्री ऑफ ओरिजन (country of origin) के बारे में अपडेट करना होगा। स्थानीय उत्पादों को प्रमोट करने के लिए यह पहल की गई है। करीब दो सप्ताह पहले एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील जैसी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों की डीपीआईआईटी के साथ बैठक हुई थी जिसमें उन्होंने ऑनलाइन बिकने वाले अपने उत्पादों पर कंट्री ऑफ ओरिजिन डिस्प्ले करने पर सहमति जताई थी। डीपीआईआईटी में संयुक्त सचिव रविंदर के मुताबिक विभाग ने कंपनियों को मौजूदा लिस्टंग के बारे में सितंबर तक अपडेट करने का सुझाव दिया है। लेकिन इसके लिए अभी कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। कई कंपनियां पहले से दे रही हैं जानकारीवॉलमार्ट की कंपनी मिंट्रा अपने प्रॉडक्ट पेज पर व्यू सप्लायर इनफॉरमेशन के तहत कंट्री ऑफ ओरिजिन की जानकारी दे रही है। इसी तरह स्नैपडील की कई लिस्टिंग में भी सेलर्स द्वारा अपडेट की गई डिटेल दिखाई जा रही है। फ्लिपकार्ट भी कई उत्पादों के कंट्री ऑफ ओरिजिन के बारे में जानकारी दे रही है। इसी तरह पेपरफ्राई और बिगबास्केट भी कई उत्पादों में यह जानकारी दे रही हैं कि वे कहां बने हैं। वोकल फॉर लोकल ऑनलाइन रिटेलर ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 3-4 महीने का समय मांगा था। उनका कहना था कि लाखों सेलरों और करोड़ों उत्पादों की जानकारी केवल कुछ हफ्तों में अपडेट नहीं की जा सकती है। चीन के साथ सीमा पर चल रही तनातनी के कारण देश में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मांग उठी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वोकल फॉर लोकल का आह्वान किया है। सरकार ने हाल में चीन के 59 एप पर भी पाबंदी लगा दी थी। इससे पहले अप्रैल में एफडीआई नीति में भी बदलाव किया गया था। इसके तहत पड़ोसी देशों खासकर चीन से आने वाले निवेश प्रस्तावों के लिए सरकारी मंजूरी को अनिवार्य बना दिया गया है। इसका मकसद कोरोना काल में भारतीय कंपनियों को चीन के अवसरवादी अधिग्रहण से रोकना था।


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