EPFO के 10 लाख करोड़ रुपये के फंड का बदल सकता है कंट्रोल

नई दिल्लीएंप्लॉयीज ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के तहत आने वाली प्रॉविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस स्कीमों के 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के फंड का कंट्रोल बदल सकता है। अभी इसका नियंत्रण लेबर मिनिस्ट्री के पास है। उसने इसे एक केंद्रीय संस्था को सौंपने का प्रपोजल दिया है, जिसके चेयरमैन की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी। इसके बाद के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के चेयरमैन लेबर मिनिस्टर नहीं रहेंगे। लेबर मिनिस्ट्री ने सोशल सिक्यॉरिटी कोड पर एक नया ड्राफ्ट पेश किया है। यह कोड मौजूदा आठ केंद्रीय लेबर कानूनों के प्रावधानों में बदलाव करेगा और EPFO की स्कीमों के लिए एक सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज बनाएगा। मिनिस्ट्री ने सभी तीनों स्कीमों के लिए सरकार की ओर से बनाए गए अलग फंड्सस का एडमिनिस्ट्रेशन सेंट्रल बोर्ड को देने का प्रपोजल पेश किया है। सोशल सिक्यॉरिटी कोड, 2019 में मौजूदा और नए सभी एंप्लॉयीज को नैशनल (NPS) में शामिल होने का विकल्प देने का भी सुझाव है। सेंट्रल बोर्ड में केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के अलावा केंद्र सरकार के पांच प्रतिनिधि, विभिन्न राज्य सरकारों के 15 प्रतिनिधि, एंप्लॉयर्स और एंप्लॉयीज के 10 प्रतिनिधि शामिल होंगे। साथ ही, यह प्रपोजल भी दिया गया है कि केंद्र सरकार इन स्कीमों के लिए फंड (प्रॉविडेंट फंड के लिए), पेंशन फंड (पेंशन स्कीम के लिए) और इंश्योरेंस फंड (EDLI स्कीम के लिए) बना सकती है। इन फंड का कंट्रोल सेंट्रल बोर्ड के पास होगा। लेबर मिनिस्ट्री ने ड्राफ्ट कोड पर स्टेकहोल्डर्स से 25 अक्टूबर तक टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद कोड को अंतिम रूप देने के लिए विचार-विमर्श किया जाएगा। लेबर मिनिस्टर संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को कहा था कि मिनिस्ट्री ड्राफ्ट कोड के लिए जल्द ही लोगों से राय मांगेगी। हालांकि, इस प्रपोजल का ट्रेड यूनियंस कड़ा विरोध कर सकती हैं। आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ के वृजेश उपाध्याय ने हाल ही में ईटी को बताया था कि एंप्लॉयीज को EPFO और NPS के बीच चुनने का विकल्प देने के प्रपोजल का वे विरोध करेंगे। उनका कहना था कि ये दोनों स्कीमें समान नहीं हैं। उपाध्याय ने बताया था, 'NPS में शिफ्ट होने का विकल्प देना एंप्लॉयीज के हित में नहीं होगा।' AITUC की जनरल सेक्रेटरी अमरजीत कौर ने कहा कि मौजूदा सोशल सिक्यॉरिटी कानूनों को कमजोर करने की सरकार की कोशिश का यूनियन विरोध कर रही है। उनका कहना था, 'इस सरकार को एंप्लॉयीज की जरूरतों की जानकारी नहीं है और वह सभी सोशल सिक्योरिटी कानूनों को कोड में तब्दील कर हमारे फंड हड़पना चाहती है।'


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