सागर मालवीय, मुंबई देश का वित्त वर्ष 2020 के दौरान पिछले 15 वर्षों की सबसे खराब रेवेन्यू ग्रोथ का गवाह बन सकता है। एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि खेती-बाड़ी, कैश और रोजगार से जुड़े मसलों के बने रहने के कारण ऐसा होने का डर है। यह सुस्ती करीब तीन साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी से व्यापार में जो बाधाएं आईं, उसके कारण 2017 में इस पर परदा पड़ गया था। फिर लो बेस इफेक्ट के कारण वित्त वर्ष 2019 में ग्रोथ दिखी तो भी सुस्ती की बात छिप गई थी। क्रेडिट सुइस ने कहा, 'वित्त वर्ष 2016-19 के बीच सुस्ती के बावजूद एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे में तेजी से बढ़ोतरी हुई क्योंकि क्रूड ऑइल के दाम में कमी और जीएसटी से जुड़ी बचत के कारण वे अपना मार्जिन बढ़ा सकी थीं।' बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स इस साल अब तक 7.4 प्रतिशत गिरा है, वहीं इस दौरान सेंसेक्स 1.4 प्रतिशत चढ़ा है। पिछली चार तिमाहियों से ग्रोथ रेट में कमी हो रही है, लेकिन फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स सेगमेंट ने जून तिमाही में 10% ग्रोथ दर्ज की थी। वह सालभर पहले की इसी तिमाही में हासिल 10.6% ग्रोथ से कुछ ही कम थी। हालांकि तिमाही दर तिमाही आधार पर एफएमसीजी में वैल्यू या रेवेन्यू ग्रोथ पिछले वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में दर्ज 16.2% की ग्रोथ रेट से लगातार घटती आ रही है। रिपोर्ट में कहा गया, 'हमारा अनुमान है कि हम जिन कंपनियों को कवर करते हैं, उनकी आमदनी में बढ़ोतरी की दर वित्त वर्ष 2020 की दूसरी और तीसरी तिमाहियों में और घटकर 5% रह जाएगी। इस तरह वित्त वर्ष 2020 एफएमसीजी के लिए पिछले 15 वर्षों में सबसे कम ग्रोथ वाला साल बन जाएगा। ऐसी कम ग्रोथ इससे पहले 2000-03 में दिखी थी।' हालांकि साल की दूसरी छमाही में कंपनियां बेहतर डिमांड की उम्मीद कर रही हैं। गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स ने कहा कि सुस्ती अस्थायी है और स्थिति बदलनी चाहिए।
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