‘युआन की तर्ज पर 3% कमजोर हो सकता है रुपया’

सैकत दास, मुंबई रुपये में इस साल के मुकाबले तीन प्रतिशत की कमी आ सकती है। 23 मार्केट पार्टिसिपेंट्स के इकनॉमिक टाइम्स के सर्वे में यह राय सामने आई कि में कमजोरी और भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए ऐसा हो सकता है। इनमें से तीन चौथाई का मानना है कि मौजूदा स्तर से नीचे जा सकता है। 40 प्रतिशत पार्टिसिपेंट्स ने कहा कि डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 74 के स्तर तक जा सकती है। अन्य पार्टिसिपेंट्स ने भी रुपये में कमजोरी की संभावना जताई। इस बारे में HDFC बैंक के एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट भास्कर पांडा ने कहा, ‘युआन में कमजोरी और इमर्जिंग मार्केट्स की मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने से आने वाले दिनों में रुपये पर भी दबाव बन सकता है।’ उन्होंने बताया, ‘चीन और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध के जारी रहने से भारत सहित अन्य इमर्जिंग मार्केट्स पर दबाव बन सकता है।’ पिछले एक महीने में युआन में डॉलर की तुलना में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई है। HDFC बैंक का मानना है कि डॉलर की तुलना में रुपया इस साल 74.50 तक जा सकता है, जो इसका अब तक का सबसे निचला स्तर होगा। पिछले साल 11 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबले रुपया 74.48 तक गया था। सरकार भी निर्यात बढ़ाने के लिए रुपये को कमजोर करने के हक में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले शुक्रवार को अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के लिए राहत उपायों का ऐलान करते वक्त कहा था कि रुपये में गिरावट से निर्यातकों को लाभ होगा। उन्होंने कहा था कि रुपये में कमजोरी से निर्यात बढ़ेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी। पिछले शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 71.66 पर बंद हुआ था, जबकि एक दिन पहले यह 8 महीने के निचले स्तर 71.98 तक चला गया था। डीलरों ने बताया कि पिछले शुक्रवार के ऐलान से विदेशी निवेश बढ़ेगा, जिससे रुपये में गिरावट रुक सकती है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने बताया, ‘सरकार के हालिया कदमों का भारतीय मुद्रा पर पॉजिटिव असर होगा, लेकिन ग्लोबल फैक्टर्स के कारण समय-समय पर इसमें कुछ उतार-चढ़ाव हो सकता है।’ तीन चौथाई पार्टिसिपेंट्स ने यह भी कहा कि बॉन्ड यील्ड में मौजूदा स्तरों से गिरावट आएगी। घोष ने कहा, ‘सरकार ने वित्तीय अनुशासन से समझौता नहीं किया है। इसलिए सरकारी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आएगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने ग्रोथ संबंधी चिंताओं को स्वीकार किया है, जिससे ब्याज दरों में और कमी हो सकती है। रिजर्व बैंक पहले ही अपना रुख ग्रोथ बढ़ाने पर शिफ्ट कर चुका है। पिछले मंगलवार को सरकारी बॉन्ड यील्ड उछलकर 6.64 प्रतिशत हो गई थी, जबकि 7 अगस्त को रिजर्व बैंक के रेपो रेट को घटाकर 5.40 प्रतिशत करने वाले दिन यह 6.27 प्रतिशत पर थी। वहीं, पिछले शुक्रवार को यील्ड 6.57 प्रतिशत रही थी। बंधन बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सिद्धार्थ सान्याल ने कहा, ‘ग्रोथ कमजोर है। सरकार ने जो हालिया ऐलान किए हैं, उनसे सेंटीमेंट मजबूत होगा।’ RBI इस साल अब तक रेपो रेट में 1.1 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। यह वह दर है, जिस पर बैंकों को RBI कर्ज देता है। रेपो रेट अभी 9 साल के निचले स्तर पर है।


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