चुनाव प्रचार सामग्री का बाजार एक और मुश्किल से जूझ रहा है। आखिरी समय तक पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग और उम्मीदवारों पर फैसला नहीं हो पाने से कस्टमाइज्ड मैटीरियल की डिमांड जोर नहीं पकड़ सकी है, जबकि आखिरी समय में बड़े पैमाने पर फेरबदल की आशंका भी बनी हुई है।
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