भारतीय किसानों पर विकल्पों का बोझ

वाशिंगटन, दो मार्च (भाषा) कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के अत्यधिक विकल्प होने और एक ‘अच्छी पैदावार’ का मतलब समझने के लिए बिना किसी विश्वसनीय उपाय के भारतीय किसानों को कृषि संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय अमीर गांवों का अनुसरण करना पड़ता है। भारत सरकार ने 1990 के दशक में अर्थव्यवस्था का उदारीकरण करने के बाद उर्वरकों, कीटनाशकों, पानी और बीजों पर सब्सिडी वापस ले ली थी। सार्वजनिक कृषि वस्तुओं का भंडारण करने वाली दुकानें अचानक नए निजी ब्रांडों से भर गई थीं। अमेरिका में पर्ड्यू विश्वविद्यालय के एक पर्यावरण मानवविज्ञानी एंड्रयू फ्लैक्स ने कहा, ‘‘उपभोक्ता वैज्ञानिक इसे ‘पसंद

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