मौलिक व्यास, मुंबईबैंकरप्ट्सी कोर्ट ने अपने पिछले निर्देश के अनुसार वित्तीय मुश्किलों के कारण बंद हो चुकी के लेंडर्स को फंड जारी करने को कहा है। इस निर्देश का उल्लंघन करना कोर्ट के आदेश की अवमानना हो सकता है। (NCLT) की मुंबई बेंच ने बुधवार को जेट एयरवेज के फाइनैंशल क्रेडिटर्स को निर्देश दिया कि जिन बैंकों ने कंपनी को चलाने के लिए फंड जारी करने के उसके सितंबर के ऑर्डर का पालन नहीं किया है उन्हें इसे मानना होगा। भास्कर पंतुला मोहन की अगुवाई वाली डिविजन बेंच ने कहा, 'हम कॉर्पोरेट इन्सॉल्वंसी रेजॉल्युशन प्रोसेस (CIRP) को पूरा करने के लिए कंपनी की वैल्यू बचाने के उद्देश्य से फंड जारी करने का अपना निर्देश दोहराते हैं। क्रेडिटर्स की कमिटी (CoC) की ओर से किसी लापरवाही से जेट के लिए ऑफर की वैल्यू घट जाएगी। CoC को 20 जनवरी तक फंड जारी करना होगा। ऐसा न होने पर बेंच कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही करेगी।' जुलाई में हुई क्रेडिटर्स की समिति की पहली मीटिंग में इस फंडिंग में बैंकों की हिस्सेदारी को स्वीकृति दी गई थी। लेंडर्स ने संयुक्त तौर पर 63 करोड़ रुपये देने का फैसला किया था। हालांकि, अभी तक केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ही 10 करोड़ रुपये का अपना हिस्सा दिया है। अन्य लेंडर्स में यस बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, IDBI बैंक और ऐक्सिस बैंक शामिल हैं। IDBI और इंडियन ओवरसीज बैंक ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (PCA) का हवाला देते हुए फंड जारी करने में अपनी असक्षमता की जानकारी दी है। इन बैंकों का कहना है कि RBI से अनुमति मिलने पर ही वे जेट एयरवेज के लिए फंड जारी कर सकते हैं। NCLT ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को तय की है। जेट एयरवेज के रेजॉल्युशन प्रफेशनल (RP) को लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के क्लेम मिले थे। उन्होंने अभी तक इनमें से केवल फाइनैंशल क्रेडिटर्स के एक तिहाई क्लेम को ही स्वीकार किया है। RP ने फाइनैंशल इंस्टीट्यूशंस के करीब 8,500 करोड़ रुपये के क्लेम को स्वीकृति दी है और 15 हजार करोड़ रुपये के क्लेम की पुष्टि की जा रही है। जेट एयरवेज में कुछ विदेशी इन्वेस्टर्स ने दिलचस्पी दिखाई थी लेकिन डील को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
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