सरिता सिंह, नई दिल्लीसरकार ने कमर्शल माइनिंग के लिए कोयला सेक्टर के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं। उसने ऑक्शन में एंड-यूज और पहले के अनुभव से जुड़ी पाबंदी खत्म कर दी है। सरकार ने यह भी कहा है कि इससे कोल इंडिया के दबदबे में कोई कमी नहीं आएगी। यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को मिनरल लॉज (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस 2020 को भी मंजूरी दे दी। इसके जरिए कोल माइंस (स्पेशल प्रोविजंस) ऐक्ट, 2015 और माइंस ऐंड मिनरल्स (डिवेलपमेंट ऐंड रेग्युलेशन) ऐक्ट, 1957 में संशोधन किया गया है। आयरन ओर की माइनिंग लीज इस साल मार्च में एक्सपायर होने से पहले उनका ऑक्शन शुरू कराने के लिए माइंस ऐंड मिनरल्स (डिवेलपमेंट ऐंड रेग्युलेशन) ऐक्ट, 1957 में संशोधन जरूरी था। ऑर्डिनेंस से भविष्य में कैप्टिव कोल ब्लॉक का ऑक्शन बंद हो जाएगा। सरकार स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार विमर्श करने और बिड रूल्स जारी करने के बाद इसी महीने कमर्शल कोल माइनिंग ऑक्शन प्रोसेस शुरू कराना चाहती है। कोल ऐंड माइंस मिनिस्टर प्रह्लाद जोशी ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'माइनिंग कानूनों में संशोधन होने से कोयला क्षेत्र में तरक्की के नए मौके बनेंगे।' जोशी ने कहा कि पिछले साल 1.75 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 23.5 करोड़ टन कोयले का आयात हुआ था और इसमें से 10 करोड़ टन बिना सब्स्टीट्यूट वाला कोकिंग कोल था। उन्होंने कहा कि सरकार को पावर प्लांट्स की तरफ से कोयले का आयात समय के साथ बंद होने की उम्मीद है। ऑर्डिनेंस इंडिया में रजिस्टर्ड कंपनियों को कोल ब्लॉक के लिए बोली लगाने और उन्हें विकसित करने की इजाजत देता है। अब तक स्टील, पावर और कोल वॉशिंग सर्विसेज कंपनियों के अलावा किसी को कोल ब्लॉक के लिए बिड करने की इजाजत नहीं थी। ब्लॉक्स के कारण बिडिंग के लिए कंपनी का इंडिया में माइनिंग करने का अनुभव होना भी जरूरी था। कोल ऐंड माइंस मिनिस्टर ने कहा कि कोल इंडिया को 2023-24 तक 1 अरब टन की कोल माइनिंग करने के लिए कहा गया है लेकिन वह मांग पूरी करने लायक कोयले का उत्पादन नहीं कर पा रही है। इसलिए प्राइवेट प्लेयर को माइनिंग की इजाजत देना जरूरी हो गया है। जोशी ने कहा कि खनन कानूनों में संशोधन से कोल ब्लॉक ऑक्शन में ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि पीबॉडी, BHP बिलिटन और रियो टिंटो जैसी माइनिंग दिग्गजों के अलावा इंडियन और ग्लोबल कॉर्पोरेट्स की तरफ से निवेश आ सकता है।
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