नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दूरसंचार नियामक ट्राई ने स्पेक्ट्रम की जो कीमतें सुझायी हैं वे आधार दर की गणना के सिद्धांतों में एकरूपता नहीं होने की वजह से अधिक हैं। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। इंडियन काउंसिल फोर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) और ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने एक संयुक्त रिपोर्ट में कहा है, ‘‘1800 मेगाहर्ट्ज बैंड की कीमत के हमारे आकलन से यह पता चला है कि आरक्षित कीमत न सिर्फ अधिक बनी हुई है, इसकी गणना के लिये अपनाये गये सिद्धांतों में भी समानता नहीं है।’’ रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई)
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