नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय के फंसे कर्ज के समाधान पर जारी परिपत्र को रद्द करने के आदेश से बिजली कंपनियों के साथ-साथ बैंकों को भी राहत मिलेगी। इसके साथ कर्ज के पुनर्गठन में लचीलापन आएगा। लेकिन इससे ऋण शोध कार्यवाही धीमी होगी। विशेषज्ञों ने मंगलवार को यह कहा। न्यायालय ने मंगलवार को आरबीआई के 12 फरवरी 2018 के उस परिपत्र को रद्द कर दिया जिसमें बड़ी कंपनियों के एक दिन के कर्ज चूक की पहचान तथा इसके समाधान के लिये ऋण शोधन कार्यवाही शुरू करने को लेकर नियमों का उल्लेख था।
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