पिछले लोकसभा चुनाव में 45 करोड़ से अधिक माइग्रेंट ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। ये माइग्रेंट देश में ही कारोबार, शिक्षा या शादी के कारण दूसरे शहरों में रह रहे हैं। सिर्फ वोट देने के लिए घर लौटना उनके लिए संभव नहीं है। जब एनआरआई, सशस्त्र बल के लोगों को वोटिंग की सुविधा मिल सकती है, तो इन माइग्रेंट भारतीयों को क्यों नहीं।
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