पीओके में कैसे दखल बढ़ा रहा ड्रैगन, जानिए चीन की बैचेनी का राज

इस्लामाबाद और गिलगित बाल्टिस्तान में की मदद से अपना दबदबा बढ़ाने में लगा है। हजारों की संख्या में चीनी नागरिक सड़क, डैम, पुल और टनल के निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं। पीओके में बढ़ते चीनी प्रभाव का असर भारत पर भी दिखाई दे रहा है। कई विशेषज्ञों ने चीन की चाल को ताइवान के साथ भी जोड़ा है। डैम में चीन लगा रहा पैसा गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान चीनी मदद से बांध बनाने की तैयारी कर रहा है। बुधवार को पाकिस्तान की सरकार ने चीन की सरकारी कंपनी (चाइना पावर) और पाकिस्तानी सेना की बांध निर्माण से संबंधित कंपनी (फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाईजेशन-एफडबल्यूओ) के बीच 5.8 अरब अमेरिकी डॉलर के संयुक्त करार पर हस्ताक्षर किए थे।इस निर्माण में चीनी कंपनी की 70 फीसदी जबकि पाकिस्तान की 30 फीसदी भागीदारी रहेगी। भारत ने जताया विरोध पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान में बन रहे दिआमेर-ब्हाशा बांध का भारत ने विरोध जताते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में ऐसी परियोजनाएं शुरू किया जाना ठीक नहीं है। बता दें कि इस बांध का बजट 1406 बिलियन पाकिस्तानी रुपये है। इस प्रोजक्ट को 2028 तक पूरा होना है। सीपीईसी बना चीन के गले की फांस चीन पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर अब ड्रैगन के गले की फांस बन गया है। अरबों का पैसा लगाने के बाद भी चीन को वह फायदा नहीं मिल रहा है जिसके लिए उसने 60 अरब डॉलर का निवेश किया था। पाकिस्तान में इसे लेकर राजनीति भी चरम पर है। वहीं भ्रष्टाचार में डूबे पाकिस्तानी नेता सड़क निर्माण कार्य में कोताही भी बरत रहे हैं। चीन को निवेश डूबने का डर सीपीईसी में 60 अरब डॉलर का निवेश करने के बाद चीन को पूरी योजना पर पानी फिरता दिख रहा है। गिलगित बाल्टिस्तान और पीओके के स्थानीय लोग भी इस प्रोजक्ट के खिलाफ हैं। पाकिस्तान की राजनीति भी चीन के लिए समस्या बनी हुई है। कबायली इलाकों में काम कर रहे चीनी नागरिकों पर हमले भी बढ़े हैं। पाकिस्तान के सामने कर्ज लौटाना बना समस्या सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए पाकिस्तान दिसंबर, 2019 तक चीन से करीब 21.7 अरब डॉलर कर्ज ले चुका था। इनमें से 15 अरब डॉलर का कर्ज चीन की सरकार ने और बाकी का 6.7 अरब डॉलर वहां के वित्तीय संस्थानों से लिया गया है। अब पाकिस्तान के सामने इस कर्ज को वापस लौटाना बड़ी समस्या बन गया है। पाक के पास महज 10 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार ही है और वह इतनी बड़ी धनराशि चीन को वापस नहीं कर सकता। भारत का घेरना है मकसद चीन पीओके में भारी निवेश कर वहां खुद को जमाने की कोशिश कर रहा है। उसे भारत को घेरने के लिए पीओके सबसे उपयुक्त स्थान लग रहा है। पाकिस्तान के हालात का पूरा फायदा उठाते हुए चीन यहां बड़े पैमाने पर इंफ्रास्टक्चर का निर्माण कर रहा है। जिससे वह कश्मीर के दोनों तरफ से भारत पर दबाव बढा सके।


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