नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वह वाणिज्य मंत्रालय से मिलकर यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही हैं कि रक्षा क्षेत्र में आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आंकड़ों में स्पष्ट तौर रूप से परिलक्षित हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान में रक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आंकड़ों को समाहित करने में दिक्कत पेश आ रही है। सीतारमण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से साक्षात्कार में कहा, “मैं वाणिज्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही हूं ताकि इस अस्पष्टता को दूर किया जा सके।” रक्षा मंत्री ने कहा, “कई भारतीय कंपनियां कई प्रमुख सामानों का उत्पादन कर रही है। उदाहरण के तौर पर हमने भारत निर्मित बंदूकों का ऑर्डर दिया है। यह कैसे संभव है... इसलिए बहुत कुछ हो रहा है। लेकिन अगर आप रक्षा क्षेत्र में एफडीआई का पता लगाना चाहेंगे तो संभवत: आप ऐसी जगह इसे ढूंढ रहे होंगे जहां इसे स्पष्ट तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है।” रक्षा मंत्री से पूछा गया था कि विदेशी निवेश नियमों में ढील दिये जाने के बावजूद रक्षा क्षेत्र में एफडीआई क्यों नहीं बढ़ पा रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र से जुड़े सामानों को सामंजस्यपूर्ण प्रणाली कोड (एचएससी) के तहत स्पष्ट तौर पर परिभाषित किये जाने की जरूरत है। ’’ ..... माना कि कोई सेंसर विनिर्माण में निवेश करता है। इसका उत्पादन रक्षा क्षेत्र के लिये भी किया जाता है। कई लोग हैं जिनके पास सेंसर उत्पादन के लिये एफडीआई आ रहा है। क्या हमने उन्हें इसमें शामिल किया है? हमें मालूम नहीं है। हम ऐसे मुकाम पर हैं जहां हमने रक्षा उद्योग को पूरी तरह परिभाषित नहीं किया है। इसलिये व्यापक तौर पर यह कहना कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में कुछ ज्यादा नहीं हो रहा है इसे अभी समझना होगा।’’भाषा अंकित महाबीरमहाबीर
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