कोर्ट ने रद्द किया टाटा का सौ साल पुराना कानून, साइरस मिस्त्री की बड़ी जीत, जानें बड़ी बातें

नई दिल्ली नैशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) ने सायरस मिस्त्री को टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के एग्जिक्युटिव चेयरमैन पद पर बहाल कर दिया।ट्राइब्यूनल ने कंपनी के सौ साल पुराने कानून को दरकिनार करते हुए कहा है कि टाटा संस के एग्जिक्युटिव चेयरमैन पद पर मिस्त्री की बहाली का आदेश चार हफ्ते बाद लागू होगा। तीन साल पहले मिस्त्री को इस पद से बर्खास्त कर दिया गया था। ने अपने 172 पन्ने का आदेश में कहा कि अक्टूबर 2016 में मिस्त्री को हटाने का टाटा संस का कदम अवैध था। 1868 में टाटा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब कंपनी को अपने फैसले पर इस तरह की कानूनी फजीहत झेलनी पड़ी हो। आइए जानते हैं कुछ अहम सवालों के जवाब... क्या है मामला टाटा संस ने साइरस मिस्त्री को 24 अक्टूबर, 2016 को टाटा संस के बोर्ड ने हटा दिया था। कंपनी ने मिस्त्री की जगह एन चंद्रशेखरन को एग्जिक्युटिव चेयरमैन बनाया दिया था। तब कहा गया था कि ऐसा उनकी 'नॉन-परफॉर्मेंस' की वजह से किया गया। उसके बाद से वह टाटा ग्रुप से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। क्या है एनसीएलएटी ने टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ असोसिएशन' के आर्टिकल 75 को भी दरकिनार कर दिया जिसमें मेजॉरिटी शेयरहोल्डर्स को माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स पर उनके शेयर बेचने को मजबूर करने की अनुमति मिलती है। आर्टिकल 75 कंपनी को कभी भी, किसी भी शेयरधारक के 'ऑर्डिनरी शेयरों' को बिना सामान्य प्रक्रिया का पालन किए ट्रांसफर करने की अनुमति देता है। हालांकि, कंपनी ने इस आर्टिकल का इस्तेमाल पहले कभी नहीं किया था। टाटा संस और साइरस मिस्त्री के बीच लड़ाई का बड़ा मुद्दा यही था। टाटा में मिस्त्री परिवार का कितना हिस्सा मिस्त्री और उनके बड़े भाई शापूर की उनकी इन्वेस्टमेंट कंपनियों के जरिए टाटा संस में 18.4% स्टेक है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स का 66% हिस्सा है। 2017-18 में टाटा ग्रुप की कंपनियों का कुल रेवेन्यू 110.7 अरब डॉलर था। NCLAT ने आर्टिकल के इस्तेमाल पर क्या कहा एनसीएलएटी ने स्पष्ट कहा कि इस आर्टिकल का इस्तेमाल साइरस मिस्त्री, उनकी कंपनियों और दूसरे माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स पर नहीं किया जा सकता है। उसने कहा, 'ऐसी शक्ति का इस्तेमाल अपवादपूर्ण परस्थितियों में या फिर कंपनी के हित में ही किया जा सकता है। हालांकि, इस शक्ति के इस्तेमाल से पहले लिखित में कारण बताने होंगे।' इस आदेश ने टाटा संस को 'पब्लिक कंपनी' से 'प्राइवेट कंपनी' में बदलने का निर्णय भी खारिज कर दिया और कहा कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की ओर से उठाया गया कदम कंपनीज ऐक्ट 2013 के सेक्शन 14 का उल्लंघन करता है। एनसीएलएटी ने कहा कि यह कन्वर्जन माइनॉरिटी मेंबर्स और डिपॉजिट्स के हितों के खिलाफ था। एनसीएलएटी ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को भी निर्देश दिया कि वह अपने रेकॉर्ड को सुधारे को टाटा संस को 'प्राइवेट कंपनी' की जगह 'पब्लिक कंपनी' बताए। उसने मिस्त्री की यह दलील मान ली कि टाटा संस, उसके डायरेक्टरों और शेयरधारकों ने माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के प्रति पूर्वाग्रह से काम किया और उनके हितों को दबाया। अब अपने अंतिम आदेश में एनसीएलएटी ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में लिए गए 'पूर्वग्रह से प्रेरित' और 'दमनकारी' फैसलों के मद्देनजर कंपनी, इसका बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और शेयहोल्डर्स उस आर्टिकल का इस्तेमाल मिस्त्री और अन्य किसी माइनॉरिटी शेयर होल्डर्स के खिलाफ नहीं करेंगे जिसका इस्तेमाल कभी नहीं किया गया।' एनसीएलएटी की दो जजों की बेंच ने टाटा संस के चेयरमैन-एमेरिटस रतन टाटा और टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी से कहा कि वे 'अग्रिम तौर पर ऐसा कोई निर्णय न करें जिसके लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के बहुमत से किए गए फैसले की जरूरत हो या ऐनुअल जनरल मीटिंग की जरूरत हो।' टाटा बोर्ड में मिस्त्री को मिलेगी जगह? टाटा संस के एग्जिक्युटिव चेयरमैन पद पर बहाल किए जाने के एनसीएलएटी के आदेश से खुश सायरस मिस्त्री टाटा ग्रुप की इस प्रिंसिपल होल्डिंग कंपनी में कद्दावर लोगों के सामने अपनी लड़ाई जारी रख सकते हैं। वह अब टाटा संस के बोर्ड में एक सीट की उम्मीद कर सकते हैं। मामले से वाकिफ लोगों ने बताया कि मिस्त्री ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिनके चलते किसी संभावित मुकदमे में उनकी बात सुनी जाएगी। आगे जाएगी लड़ाई? रतन टाटा ग्रुप की ओर से मुकदमे का अनुमान लगाते हुए मिस्त्री और उनके परिवार की इन्वेस्टमेंट फर्म्स ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दाखिल की है ताकि उनका पक्ष भी सुना जाए। मिस्त्री ने एक बयान में कहा, 'आज का जजमेंट मेरे लिए निजी जीत नहीं है। यह गुड गवर्नेंस के सिद्धांतों और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के अधिकारों की जीत है।' लॉ फर्म ध्रुव लीलाधर ऐंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर चंदूभाई मेहता ने कहा, 'रतन टाटा, टाटा संस या उनके कंट्रोल वाली कोई भी इकाई अगर मिस्त्री के खिलाफ राहत मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचती है तो उसे 48 घंटे का अडवांस नोटिस देना होगा ताकि कैविएट दाखिल करने वाले की बात सुने जाने के बाद ही कोई आदेश जारी हो।' टाटा ग्रुप के शेयर टूटे इस रूलिंग के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। टाटा मोटर्स का शेयर करीब 3 प्रतिशत गिरा। टाटा ग्लोबल बेवरेजेज में 4 प्रतिशत और इंडियन होटल्स में 3 प्रतिशत गिरावट आई।


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