योगिमा शर्मा, नई दिल्ली भारत सरकार फूड सिक्यॉरिटी से धीरे-धीरे न्यूट्रिशन सिक्यॉरिटी यानी पोषण सुरक्षा की तरफ बढ़ने की तैयारी कर रही है। इसके तहत मीट, अंडा, मछली और चिकन जैसे प्रोटीनयुक्त फूड पर (PDS) के जरिए कम कीमत पर गरीबों को देने के बारे में सोचा जा रहा है। अभी तक के जरिए गेहूं, चावल और मोटे अनाज पर सब्सिडी दी जाती है। योजना से वाकिफ सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पोषण सुरक्षा को हासिल करने के लिए नीति आयोग योजना बनाने में जुटा है। उन्होंने बताया, 'आयोग के शीर्ष अधिकारी, पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम में शामिल फूड आइटम्स की सूची को व्यापक बनाने पर विचार कर रहे हैं। इसकी शुरुआत कम से कम एक या दो प्रोटीनयुक्त फूड को शामिल करने हो सकती है।' भारत ज्यादातर अनाज के मामले में आत्मनिर्भर है। इसके बावजूद यहां कुपोषण, अनीमिया, अविकसित और बौनेपन की समस्या बड़े पैमाने पर है। इन समस्याओं से निपटने के लिए आयोग इस कदम पर विचार कर रहा है। नीति आयोग फिलहाल अगले 15 साल के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट बनाने में जुटा है। इसमें देश को पौष्टिक सुरक्षा की ओर बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया जाएगा। इस विजन डॉक्यूमेंट के अगले साल की शुरुआत में पेश किए जाने की उम्मीद है और यह 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी होगा। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इसे लागू करने से देश का फूड सब्सिडी बिल कई गुना बढ़ सकता है। 2019-20 में फूड सिक्यॉरिटी बिल के 1.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
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