ओला-ऊबर कैब राइड में बेस फेयर के 3 गुने तक सर्ज प्राइसिंग!

निष्ठा सलूजा, नई दिल्ली सरकार ओला और ऊबर जैसे के लिए सर्ज प्राइसिंग (मांग बढ़ने पर राइड का किराया बढ़ाना) की सीमा बेस फेयर के तीन गुने पर सीमित कर सकती है। हालांकि ड्राइवरों से वे जो कमीशन लेती हैं, उसकी लिमिट 20 पर्सेंट पर तय की जा सकती है। मामले से वाकिफ एक सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया कि फेयर पर लगाम कसने के साथ यह भी तय किया जा सकता है कि दिन में किस दौरान और कितने घंटों या राइड के लिए सर्ज प्राइसिंग की अनुमति मिलेगी। अधिकारी ने बताया, 'सर्ज प्राइसिंग में फेयर को बेस प्राइस के तीन गुना तक बढ़ाने की अनुमति मिल सकती है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि दिन में किस दौरान इन्हें लागू किया जा सकेगा।' नए नियम की गाइडलाइंस पर आधारित हैं, जिन्हें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 2016 में जारी किया था। पॉलिसी बनाने वाली समिति ने सुझाव दिया था कि डिमांड और सप्लाई में सामंजस्य बैठाने के लिए डायनमिक प्राइसिंग की रेंज तय की जानी चाहिए। कमिटी ने कहा था, 'हमारे मुताबिक अधिकतम टैरिफ को न्यूनतम टैरिफ के तीन गुना तक होने की अनुमति होनी चाहिए। रात के दौरान टैक्सी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए आधी रात से लेकर सुबह पांच बजे तक मैक्सिमम टैरिफ की सीमा बढ़ाकर चार गुना करने की इजाजत दी जा सकती है।' सरकार कैब कंपनियों का कमीशन 20 पर्सेंट पर बरकरार रहने दे सकती है। फेयर का बाकी 80 पर्सेंट ड्राइवर का होगा। अधिकारी ने बताया, 'राज्य चाहें तो एग्रीगेटर के हिस्से पर शुल्क लगा सकते हैं।' गाइडलाइंस के तहत कैब फर्मों को ग्राहकों की शिकायतों का निवारण करने के लिए एक डिस्प्यूट रिड्रेसल मकैनिज्म अपनाना पड़ सकता है। इसमें राइडर्स की शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू करना होगा। देश में कैब ऐग्रिगेटर्स का अभी रेगुलेशन नहीं होता है। नई गाइडलाइंस से उनके कामकाज को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। अधिकारी ने बताया, 'हमने कार की सफाई और देखरेख के पैमाने भी तय किए हैं।' अन्य अधिकारी ने बताया कि गाइडलाइंस की समीक्षा करने के लिए बनाई गई कमिटी इन पर विचार-विमर्श कर चुकी है। पॉलिसी को आखिरी मंजूरी मिलने का इंतजार है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि बिना किसी कारण राइड कैंसल करने पर ड्राइवरों पर जुर्माना लगना चाहिए। राइड कैंसल होने का चार्ज अभी आमतौर पर ग्राहकों को भरना पड़ता है। अधिकारी ने बताया, 'हमने दिन में कुछ अंतराल पर सेल्फी वेरिफिकेशन का भी प्रस्ताव दिया है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि सुनिश्चित ड्राइवर ही कैब चला रहा है।' मोटर वीइकल्स (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 2019, में ऐग्रिगेटर्स को डिजिटल प्लैटफॉर्म के तौर पर परिभाषित किया गया है, जिनका इस्तेमाल पैसेंजर ड्राइवर से जुड़ने के लिए करते हैं। पारदर्शी नियमों की गैरमौजूदगी में सर्ज प्राइसिंग कई बार कैब की सुविधा लेने वालों की जेब पर भारी पड़ती है। पॉलिसी के जरिए ऐग्रिगेटर्स का रेगुलेशन करने के साथ शेयर्ड मोबिलिटी को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।


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