एंप्लॉयीज को खुश रखने के लिए HR मैनेजर बने स्टार्टअप्स के मालिक

श्रीराधा डी बसु/बृंदा सरकार, कोलकाता/बेंगलुरुभारी वर्कलोड, देर तक काम और आमदनी-मुनाफा बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करने वाले फाउंडर्स के जिम्मे अब नई जिम्मेदारी आ गई है। उन पर ऐसी पॉलिसी तैयार करने की जवाबदेही है, जिससे यंग एंप्लॉयीज कंपनी में बने और हर चुनौती के लिए तैयार रहें। एंप्लॉयीज को इंगेज और खुश रखने के लिए नीति बनाने की प्रक्रिया में स्टार्टअप के युवा सीईओ भी एचआर टीम के बराबर भूमिका निभा रहे हैं। इनमें को वैल्यू अनलॉक का मौका देने वाला ईसॉप्स रिपरचेज प्लान, खुद के काम के घंटे/समय निर्धारित करने की इजाजत और नई स्किल सीखने के लिए भत्ते से लेकर ऑफिस में छोटे अवधि की नींद लेने के लिए रूम बनाए जैसी चीजें शामिल हैं। लॉजिस्टिक टेक स्टार्टअप ब्लैकबक के सीईओ राजेश याबजी ने बताया, 'स्टार्टअप में इनोवेशन, चुस्ती और गतिशीलता की जरूरत होती है। इस वर्क कल्चर के हिसाब से एचआर पॉलिसी भी होनी चाहिए।' ब्लैकबक ने पिछले महीने डी सीरीज के तहत निवेशकों से फंड जुटाया था, जिससे वह यूनिकॉर्न यानी एक अरब डॉलर की कीमत के करीब पहुंच गई है। याबजी ने बताया कि वह और कंपनी के दूसरे सह-संस्थापक शुरू से ही जोशीले वर्क एनवायरमेंट के लिए एचआर टीम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ब्लैकबक ने पिछले 4 साल में एंप्लॉयीज के पास मौजूद कुछ स्टॉक ऑप्शंस को दो बार बायबैक किया। पहली बार ऐसा 2017 में हुआ था और दूसरा बायबैक हाल में हुआ। इसमें करीब 100 एंप्लॉयीज ने ई-सॉप्स का एक हिस्सा कंपनी को बेचने का फैसला किया। इस राउंड में करीब 37 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जिसमें एंप्लॉयीज ने काफी दिलचस्पी ली। कई एंप्लॉयीज ने वैल्यू अनलॉकिंग का फायदा उठाते हुए शेयर बेच दिए, वहीं कुछ ने इसे अपने पास बनाए रखने का फैसला किया। याबजी ने बताया, 'हम ऐसा प्रोग्राम बनाने में विश्वास रखते हैं, जो एंप्लॉयीज को तेज ग्रोथ दिलाने के साथ लॉन्ग-टर्म में वैल्यू क्रिएट करे।' कैशबैक वेबसाइट कैशकरो एंप्लॉयीज को काम के घंटे खुद तय करने की आजादी दे रही है। विंगिफाई ने कर्मचारियों को ऑफिस टाइमिंग्स और छुट्टियां तय करने की आजादी दी है। विंगिफाई के सीईओ स्पर्श गुप्ता ने बताया, 'हमारे यहां फ्लेक्सिबल वर्क कल्चर है। हमारी कंपनी में ऐसे लोग भी हैं, जो हफ्ते में 4 दिन भी ऑफिस नहीं आते।'


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