अयान प्रमाणिक, बेंगलुरु टेक सर्विसेज और बिजनस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) कंपनियों में होने वाले 100 कामों में सिर्फ 7 काम ही रोबोट के जरिए किए जा रहे हैं। इसे देखते हुए आने वाले समय में देश की आईटी सर्विसेज इंडस्ट्री में ज्यादा नौकरियों के खत्म होने के आसार नहीं हैं। अलग-अलग काम में (आरपीए) तकनीक के इस्तेमाल से रोल क्रिएट हुए हैं, लेकिन उन रोल्स में फिट करने के लिए कंपनियों को एम्प्लॉयी को नए सिरे से ट्रेनिंग देना पड़ रहा है। आरपीए कंपनी ऑटोमेशन एनीवेयर के मुताबिक, बड़ी टेक सर्विसेज और BPM कंपनियों में औसतन 5-7 पर्सेंट काम ऑटोमेटेड हुए हैं। आज उन कंपनियों में एचआर, बैक ऑफिस सपोर्ट और कुछ हाई-वैल्यू टास्क बॉट के जरिए हो रहे हैं। दिग्गज आरपीए फर्म यूआईपाथ (UiPath) का कहना है कि हर कंपनी में ऑटोमेशन का प्रतिशत अलग-अलग है और कुछ मामलों में यह एक अंकों से ज्यादा है। करीब 177 अरब डॉलर के आईटी बीपीएम सर्विसेज सेक्टर में लगभग 41 लाख लोग काम करते हैं। सेक्टर में इमर्जिंग टेक स्किल वाले टैलेंट की हायरिंग में हाल ही में तेजी देखी गई है। विप्रो ने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में फिक्स प्राइस प्रॉजेक्ट्स में बॉट्स के जरिए होने वाले काम बढ़कर 15 पर्सेंट हो गए थे, जो इसकी पिछली तिमाही में 11 पर्सेंट था। कंपनी ने बताया कि उसके यहां 'ह्यूमन प्लस बॉट्स' मॉडल चलता है। कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बी. एम. भानुमूर्ति ने बताया, 'चौथी औद्योगिक क्रांति में ऑटोमेशन हकीकत बनता जा रहा है। हमारा मानना है कि मनुष्य और रोबॉट एक साथ काम कर सकते हैं। ऑटोमेशन कम महत्व के काम से बढ़ता हुआ फैसले लेने तक की प्रक्रिया में शामिल होता जा रहा है। ऐसे में हम इमर्जिंग एरिया के लिए अपने वर्कफोर्स को नए सिरे से ट्रेनिंग दे रहे हैं।' ऐनालिस्ट का कहना है कि इन सर्विसेज कंपनियों में कई कामों में ऑटोमेशन लाने से नई नौकरियां पैदा हुई हैं। ऑटोमेशन के चलते नौकरियां जाने के मामले नहीं के बराबर हैं। IT रिसर्च कंपनी आईएसजी इंडिया ऑपरेशन हेड और APAC के रीजनल कंट्रोलर विश्वकुमार नंदगोपाल ने बताया, 'एल1 और एल2 (जूनियर रोल्स) में जब ऑटोमेशन को लागू किया गया, तब एल3 (मिड टू सीनियर) की हायरिंग में तेजी देखी गई। जब कुछ रोल खत्म होते हैं, तो लोगों को नए रोल में लगाया जाता है।' विश्वकुमार ने उदाहरण तौर पर बताया कि आरपीए सिस्टम के चलते बड़े पैमाने पर पैदा होनेवाले डेटा और इंटेलिजेंस पर काम करने के लिए टीमों की जरूरत होगी। आरपीए सिस्टम को मैनेज करने और उसे सपोर्ट करने के लिए भी टीम की जरूरत होगी। IT सर्विसेज कंपनियों का मानना है कि कुछ टास्क में पारस्परिक निर्भरता बनी रहेगी, ज्यादा इंटेलिजेंस वाले काम में ऑटोमेशन और ह्यूमन दोनों फैक्टर काम करेंगे।
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