आनंदिता मनकोटिया, नई दिल्ली एजीआर बकाये पर टेलिकॉम कंपनियों तथा दूरसंचार विभाग के बीच एक नई जंग छिड़ सकती है। भुगतान के लिएदूरसंचार विभाग की डेडलाइन पार करने के बीच वोडाफोन-आइडिया तथा ने कहा है कि उन्होंने एजीआर बकाये की रकम को लेकर जो अनुमान लगाया है, वह दूरसंचार विभाग द्वारा दिए गए आंकड़े से काफी कम है। बहरहाल आज का दिन बेहद अहम है, क्योंकि अगर सरकार कंपनियों की बात मानती है तो वह अपने आंकड़ों का कंपनियों के आंकड़े से मिलान कर सकती है या उनकी बैंक गारंटियों को भुना सकती है और उनके लाइसेंस कैंसल कर सकती है। दोनों कंपनियां अडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) के बकाये के बारे में अपने स्तर पर फिलहाल जो अनुमान लगा रही हैं, वह सरकारी आंकड़े से कम से कम 50 प्रतिशत कम हो सकता है। इससे दोनों पक्षों के बीच एक और रस्साकशी की स्थिति बन सकती है। पढ़ें : वोडाफोन-आइडिया का अनुमान मामले से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि एयरटेल इस बारे में गणना कर रही है और अभी यह प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि शुरुआती गणना के मुताबिक AGR का बकाया 15,000 करोड़ से 18,000 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। वहीं, दूरसंचार विभाग ने इससे पहले 35,500 करोड़ रुपये के बकाये का आंकड़ा दिया था। एयरटेल का अनुमान एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि के मामले में शुरुआती गणना के अनुसार, AGR का बकाया 18,000 करोड़ से 23,000 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने इस पर 53,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया होने की बात की थी। हालांकि वित्तीय मुश्किलों से जूझ रही वोडाफोन आइडिया अपने कैलकुलेशन का छोटा हिस्सा ही अगले कुछ दिनों में चुका सकती है। पढ़ें : यह है पेंच एक व्यक्ति ने ईटी को बताया, 'अनुमानों में अंतर की वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट के 24 अक्टूबर वाले आदेश के अनुसार AGR की गणना करने पर भी दूरसंचार विभाग की परिभाषा के अनुसार कुछ आइटम्स का डुप्लिकेशन हो जा रहा है। लिहाजा, इस लिस्ट में कुछ आइटम्स शामिल नहीं किए जा रहे हैं और उन पर ब्याज और जुर्माने की रकम भी हट जाएगी।' उन्होंने बताया कि ब्याज और जुर्माने की तय रकम नहीं है, लिहाजा मूल बकाया ही कम हो जाए तो ब्याज और जुर्माने का आंकड़ा भी काफी घट जाएगा। टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने इन दोनों कंपनियों पर 89,000 करोड़ रुपये के बकाये का जो आंकड़ा दिया है, उसमें कुल रकम का लगभग 75 पर्सेंट हिस्सा ब्याज और जुर्माने का है। सेल्फ-असेसमेंट काफी जटिल एक टेलिकॉम कंपनी के एग्जिक्यूटिव ने कहा, 'सेल्फ-असेसमेंट की प्रक्रिया काफी जटिल है। इसमें कंपनियों को पिछले 16 वर्षों के अपने रिकॉर्ड्स खोलने पड़ रहे हैं और उन आइटम्स को जोड़कर उन पर ब्याज और जुर्माने की गणना करनी पड़ रही है।' पढ़ें : आज होगा रकम पर फैसला अधिकारियों ने कहा कि टेलिकॉम डिपार्टमेंट को कंपनियों के आंकड़ों का अपनी गणना से मिलान करना होगा और हो सकता है कि वह बाकी रकम के लिए नए डिमांड नोटिस भेजे या समय पर भुगतान न करने के लिए दंड की कार्रवाई करे। अधिकारियों ने कहा कि आगे के कदम पर निर्णय सोमवार को किया जाएगा, क्योंकि सरकार ने शुक्रवार रात 11 बजकर 59 मिनट तक की जो डेडलाइन तय की थी, उसके अंदर तो कंपनियों ने भुगतान नहीं किया था। बैंक गारंटी भी भुना सकती है सरकार नियमों के अनुसार, बकाया भुगतान नहीं करने पर दूरसंचार विभाग इन कंपनियों की ओर से दी गई बैंक गारंटी भुना सकता है और आखिरी कदम के तहत लाइसेंस भी कैंसल कर सकता है। इस बारे में वोडाफोन आइडिया और एयरटेल को भेजे गई ई-मेल का उत्तर नहीं मिला। हालांकि, एयरटेल के सूत्रों ने कहा कि कंपनी ने सेल्फ असेसमेंट में पाया है कि बकाये की रकम टेलिकॉम डिपार्टमेंट के अनुमान से 'काफी कम' है।
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